Sunday, 20 August 2017

अब तक अछूता रहा स्पेन भी आतंक का शिकार

यह सभी को मालूम है कि कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के निशाने पर यूरोप है। पिछले कुछ समय से यूरोप के विभिन्न देशों में आईएस हमले कर रहा है। ताजा केस स्पेन का है। स्पेन में कुछ ही घंटे के अंतराल पर लगातार दो आतंकी हमले हुए। गुरुवार को शाम चार बजकर पचास मिनट पर एक सफेद वैन ने स्पीड में लहरते हुए सड़क किनारे खड़े लोगों को जानबूझ कर निशाना बनाया। इस हमले की चपेट में 18 देशों के नागरिक आ गए। इनमें जर्मनी, रोमानिया, इटली, अल्जीरिया और चीन जैसे देश शामिल हैं। यह हमला बार्सिलोना के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल लास रमब्लास में हुआ जो बार्सिलोना शहर के केंद्र में स्थित 1.2 किलोमीटर लंबा रास्ता है। पुलिस ने इस मामले में मोरक्को के एक व्यक्ति और उत्तरी अफ्रीका के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। तथाकथित इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पिछले एक साल में यूरोप में कई शहरों में भीड़ पर गाड़ी चढ़ाने या दौड़ाने की कई घटनाएं हुई हैं। पेरिस में नौ अगस्त 2017 को एक व्यक्ति ने कुछ सैनिकों पर डीएमडब्ल्यू गाड़ी दौड़ा दी, इसमें छह लोग घायल हो गए। लंदन में तीन जून 2017 को तीन जेहादियों ने लंदन ब्रिज पर लोगों पर वैन दौड़ा दी और कई लोगों पर चाकू से हमला किया। जून महीने में ही फिन्सबरी पार्क में मुसलमानों पर एक वैन के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। 22 मार्च 2017 को वैस्ट मिनिस्टर ब्रिज पर लोगों पर एक गाड़ी दौड़ा दी गई और कार चालक ने एक पुलिसकर्मी को चाकू से हमला कर मार दिया। बर्लिन में क्रिसमस बाजार में भीड़ को निशाना बनाया गया। फ्रांस के शहर नीस में 14 जुलाई 2016 को ट्यूनीशिया मूल के मोहम्मद लावेइज बहूलत डे पर आतिशबाजी देखने के लिए पहुंची भीड़ पर एक लारी से हमला किया गया जिसमें 86 लोगों की मौत हो गई। भीड़ पर गाड़ी चढ़ाने की घटना के कुछ ही घंटे बाद स्पेन के तटीय शहर कैम्बील्स में कुछ अन्य संदिग्धों ने इसी तरह की घटना को अंजाम देने की कोशिश की पर पुलिस ने हमला विफल करते हुए मुठभेड़ में पांच संदिग्ध आतंकियों को मारा गिराया। ऐसा माना जा रहा है कि यह हमला बार्सिलोना में हुए हमले का ही हिस्सा था। उधर स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो रखॉय ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे जेहादी हमला बताया। इस्लामिक स्टेट ने यूरोप के कई शहरों में हमले किए हैं पर पिछले एक दशक में यूरोप में हुए आतंकी हमलों से स्पेन अब तक अछूता रहा था। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आखिरी हमला मार्च 2004 में हुआ था। उस वक्त ट्रेन में हुए धमाकों में 194 लोग मारे गए थे और 180 से ज्यादा घायल हुए थे। अब स्पेन भी निशाने पर आ गया है।

-अनिल नरेन्द्र

ट्रेनों में बढ़ती असुरक्षा ः आए दिन यात्री लुट रहे हैं

मेरे भारत महान में रेलगाड़ी से सफर करने वाले यात्री कहीं भी सुरक्षित अब नहीं हैं। न स्टेशन के अंदर और न ही ट्रेनों के अंदर। राजधानी के अहम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी पिछले महीने झपटमारी और बच्चे के अपहरण जैसी वारदातों को अंजाम दिया गया। बेहद सुरक्षित माने जाने वाले राजधानी के एसी कोचों में अब तक की सबसे बड़ी चोरी की खबर है। मुंबई से दिल्ली आ रही अगस्त क्रांति राजधानी एक्सप्रेस में बदमाशों ने सात एसी कोचों के यात्रियों को बेहोश करके लाखों रुपए की नकदी, ज्वैलरी, घड़ियां और मोबाइल पर हाथ साफ कर दिया। यह वारदात मध्यप्रदेश के रतलाम के पास हुई। बदमाशों ने राजधानी के एसी-2 और एसी-3 टीयर कोचों को निशाना बनाया। वारदात को देर रात दो से तीन बजे के बीच अंजाम दिया गया। करीब 25 यात्रियों ने पर्स, गहनें और अन्य कीमती सामान लूटे जाने की बात कही है। डीसीपी (रेलवे) परवेज अहमद के मुताबिक मंगलवार-बुधवार की रात वारदात को अंजाम दिया गया। कुछ यात्रियों के मुताबिक इसी ट्रेन में एक-दो दिन पहले भी चोरी हुई थी, लेकिन घटना को दबा दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी से भी इस मामले में पूछताछ की जाएगी। अगर कोई रेलवे कर्मचारी इसमें शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर 11 यात्रियों ने एफआईआर दर्ज कराई है। इनके मुताबिक ट्रेन कोटा में जागने पर कुछ यात्रियों ने पाया कि उनके पर्स, सामान और दूसरी चीजें गायब हैं। ढूंढने पर खाली पर्स टॉयलेट के पास पड़े मिले। कुछ का कहना है कि उनके आई-फोन दूसरे इलैक्ट्रॉनिक उपकरण गायब हैं। कई के आधार कार्ड और दूसरे संवेदनशील दस्तावेज चोरी होने की शिकायत है। कुछ एफआईआर में कहा गया कि उन्हें बेहोश कर दिया गया था। कइयों ने इस वारदात में रेलवे स्टाफ के शामिल होने का आरोप लगाया। राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों को भी बदमाश लगातार निशाना बना रहे हैं। अगस्त क्रांति एक्सप्रेस से पहले अप्रैल में पटना राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में भी बिहार के बक्सर के पास लूटपाट की गई थी। इस वारदात में तो तीन यात्री घायल भी हुए थे। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अभी हाल ही में इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस में एक महिला समेत चार यात्रियों से छीना-झपटी की वारदात को अंजाम दिया गया। दिल्ली रेल मंडल में ही इस साल जून तक चोरी का आंकड़ा 1225 के करीब पहुंच गया है। पिछले साल इस तरह की कुल वारदात 2874 हुई थीं। इस महीने तक बदमाशों ने एक दर्जन ट्रेनों में लूटपाट की है। इस साल तीन ट्रेनों में डकैती भी हुई है और चार यात्रियों की हत्या का भी मामला सामने आया है। हमारा मानना है कि रेलयात्रियों की सुरक्षा के मकसद से एक केंद्रीय बल फौरन बनाने की जरूरत है जिसके पास चोरों और लुटेरों से निपटने के ज्यादा अधिकार हों। अरसे से ऐसी मांग होती रही है लेकिन अपनी लापरवाही पर लीपापोती करके रेल मंत्रालय और जीआरपी जैसे तंत्र इसके गठन में रोड़ा अटकाते रहे हैं। भारतीय रेल को ध्यान रखना होगा कि उसकी खूबी सिर्फ यही नहीं है कि वह दुनिया के विशालतम रेल नेटवर्क का कुशलता से संचालन करती है, बल्कि यह भी होना चाहिए कि उसकी ट्रेनों में यात्रा हर तरह से सुरक्षित हो। रेल मंत्रालय किराये बढ़ाता जा रहा है और सुविधाएं बढ़ाना तो दूर, यात्रियों की सफर में सुरक्षा तक देने में फेल हो रहा है। रेलमंत्री संवेदनशील व्यक्ति हैं, उम्मीद की जाती है कि वह इस समस्या पर गौर करके तत्काल कोई स्थायी समाधान करेंगे।

Saturday, 19 August 2017

आफत की बारिश

देश में भारी बारिश से हाहाकार मचा हुआ है। बारिश न हो तब भी हाहाकार और ज्यादा हो जाए तो तबाही। देश के चार राज्योंöउत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और असम में बारिश से भारी तबाही हुई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में सोमवार को सुबह बादल फटने से नौ लोगों की मौत हो गई। वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार में कई जिले जलमग्न हैं। असम में बाढ़ से बिगड़े हालात के कारण कई ट्रेनों को बुधवार तक रद्द कर दिया गया है। उत्तराखंड में कैलाश मानसरोवर मार्ग में रविवार देर रात भालपा और मांगती नाले से सटे क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही हुई जिसमें सेना के जेसीओ सहित नौ लोगों की मौत हो गई। यूपी में नदियां ऊफान पर हैं। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते उत्तरी पूर्वांचल में नदियां उफान पर हैं। प्रदेश के 40 जिले बाढ़ से घिरे हैं। कुशीनगर में रिंग बांध सोमवार को टूट गया। इससे कई गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। हिमाचल प्रदेश सहित नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण जलाशयों का जल स्तर बढ़ने और इनका पानी छोड़े जाने से पंजाब में हजारों एकड़ की फसलें जलमग्न हो गई हैं और सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पोंग डैम से पानी छोड़े जाने तथा अन्य सहायक नदियों के पानी ने पंजाब के तरनतारन जिले में ब्यास नदी के पानी ने तबाही मचाई हुई है। अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के विभिन्न स्थानों पर सड़क यातायात बाधित है। कई जिलों में व्यापक तौर पर भोजन का संकट उत्पन्न हो गया है। बिहार और नेपाल में हो रही बारिश के कारण 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। प्रभावित जिलों में रेल व सड़क सम्पर्क सेवा बाधित हुई है। सेना, एनडीआरएफ की टीम के अलावा सेना के दो हेलीकाप्टर की सहायता से युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। असम में 22.5 लाख लोगों पर राज्य के 21 जिलों में आफत आ गई है। 99 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। राहत कार्य के लिए सेना बुलाई गई है। बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि केंद्र सरकार बिहार, यूपी और असम की बाढ़ की स्थिति पर नजर रखे हुए है। बचाव राहत कार्य में मदद के लिए एनडीआरएफ के दल भेजे गए हैं। बारिश से तबाही का यह सिलसिला हर साल होता है। देश के कुछ भागों में पानी की कमी होने से लोग मरते हैं तो अन्य क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने से। इतने वर्षों में इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका। हमारे पास सब तरह के विभाग हैं, योजनाएं हैं पर समाधान नहीं।

-अनिल नरेन्द्र

...और अब बिहार में सृजन घोटाला, करोड़ों की हेराफेरी

...और अब बिहार में सृजन घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सृजन घोटाले में शनिवार तक सात एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। शुक्रवार को इसमें सात लोगों की गिरफ्तारी हुई। महाघोटाले में कल्याण विभाग की 100 करोड़ रुपए की हेराफेरी का पता चला है। अब तक 750 करोड़ रुपए के गबन के मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग में भी 50 लाख रुपए के गबन का मामला उजागर हुआ है। भूअर्जन के बाद भागलपुर में सबसे ज्यादा कल्याण विभाग में राशि की हेराफेरी की गई। इस बीच गिरफ्तार किए गए भागलपुर के डीएम के स्टेनोग्राफर प्रेम कुमार सहित सात आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। भागलपुर में सरकारी राशि के गबन में एनजीओ सृजन और बैंक के फर्जीवाड़े में अब तक 418 करोड़ रुपए गबन के कागजात मिल चुके हैं। बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शनिवार को कहा कि इस बात की भी जांच कराई जाएगी कि एनजीओ के खाते में बैंक ने सरकार की जो मोटी राशि स्थानांतरित की वह कहां गई? मुख्य सचिव ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच काफी सूक्ष्मता से हो रही है। सभी जिलों को पूर्व में यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने सभी विभागों से जुड़े बैंक खातों का सत्यापन कराएं। भागलपुर के सृजन घोटाले पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी समेत भाजपा के कई नेताओं पर हमला बोला है। लालू ने इसे पशुपालन से भी बड़ा घोटाला करार दिया और सुशील मोदी को घोटालेबाजों का संरक्षक बताया। उन्होंने पूछा कि मुख्यमंत्री की जीरो टालरेंस की नीति कहां गई? इतना बड़ा घोटाला सरकारी संरक्षण के बिना हो गया क्या? लालू ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। भ्रष्टाचार के मामले में लगातार दो महीने तक प्रेस कांफ्रेंस करके लालू परिवार को परेशानी में डालने वाले सुशील मोदी पर लालू ने पलटवार करते हुए कहा कि सृजन घोटाले की प्रकृति चारा घोटाले से मिलती है। चारा घोटाले में मुझे सिर्फ इसलिए आरोपी बना दिया गया कि वित्त विभाग का चार्ज मेरे पास था। सृजन घोटाले के दौरान वित्त विभाग सुशील मोदी के पास है। 2005 में जब नीतीश की सरकार बनी थी तभी से यह विभाग सुशील मोदी के पास है। सृजन घोटाले में अब एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का खेल बैंक और प्रशासनिक अधिकारियों में शुरू हो गया है। प्रशासनिक अधिकारी अपने हस्ताक्षर को जाली बता रहे हैं, लेकिन बैंक अधिकारी उन्हें सही ठहरा रहे हैं। सरकारी राशि घोटाले की जांच की आंच पटना, रांची और दिल्ली के कई बड़े नेताओं तक पहुंच सकती है। सृजन की वर्तमान सचिव और मनोरमा देवी को बहु प्रिया कुमार रांची के एक प्रमुख कांग्रेस नेता की बेटी हैं। यह नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री के भाई हैं। मामले की जांच हो रही है। देखें छनकर क्या-क्या निकलता है?

Friday, 18 August 2017

पाकिस्तान की 70 वर्ष की आजादी?

1947 को दोनों भारत और पाकिस्तान आजाद हुए थे। 70 साल के इस लंबे सफर में दोनों देशों में कितना अंतर आ गया है। दोनों के राजनीतिक इतिहास में जमीन-आसमान का फर्क है। पाकिस्तान की सियासत में 70 साल में लगभग साढ़े तीन दशक तक फौज की सत्ता रही। इस दौरान पाकिस्तान में चार सैनिक सरकारें गद्दीनशीं हुईं और सत्ता का कंट्रोल जनरल अय्यूब खान, जनरल याहया खान, जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ के पास था। जनरल अय्यूब से लेकर जनरल परवेज मुशर्रफ तक हर दौर में एक ही कॉमन रिएक्शन सुनने को मिलता रहा जिसमें चुनी हुई नागरिक सरकार की अक्षमता, भ्रष्टाचार और देश के लिए खतरे के दावे सबसे ऊपर थे। देश की सेना चाहती है कि सभी मामलों में उसकी सलाह से सरकारें चलाई जाएं। रक्षा विशेषज्ञ हसन असकरी का कहना है कि बाहरी सुरक्षा का बोझ उन पर है, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबला भी सेना कर रही है। नागरिक सरकार की भूमिका सीमित है। इसलिए जब सलाह-मशविरे की प्रक्रिया चलती रहती है तब तक हालात ठीक रहते हैं। हसन असकरी के अनुसार दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा बजट मामलों का है। तीसरा ऐसा होता है कि खुद को सशक्त बनाने के लिए कुछ मंत्री अनावश्यक रूप से सेना की आलोचना करते रहते हैं जिससे संबंधों में खटास आ जाती है। हाल ही में नवाज शरीफ कोर्ट से प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिए जाने के बाद जुलूस का नेतृत्व करते हुए इस्लामाबाद से लाहौर पहुंचे। इस यात्रा के दौरान उनके भाषणों में प्रत्यक्ष और कहीं-कहीं अप्रत्यक्ष रूप में भी सेना और न्यायपालिका को उनकी बर्खास्तगी के लिए दोषी ठहराया गया। अदालत के जरिये नवाज शरीफ को हटाने के फैसले ने देश को एक बार फिर नागरिक सरकार सर्वोच्चता की चर्चा को जन्म दिया है। नवाज शरीफ दो बार भारी बहुमत से सत्ता में आए, यह तीसरा मौका था जब उन्हें पद से हटना पड़ा, लेकिन इस बार संबंध बिगड़ने के क्या कारण रहे? रक्षा विशेषज्ञ आयशा सिद्दीकी का मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह विदेश नीति थी। नवाज शरीफ विदेश नीति को धीरे-धीरे बदलना चाह रहे थे और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल को एक नया आयाम देने की कोशिश कर रहे थे। इससे पाकिस्तान की विदेश नीति के केंद्र में भारत नहीं रहता। यह सेना की दुखती रग था और इसलिए मीडिया ट्रायल शुरू किया गया ताकि मियां साहब को हटाया जा सके। रक्षा विशेषज्ञ शुजा नवाज का कहना है कि सेना और नागरिक सरकार के बीच विरोधाभास का मुख्य कारण कथनी और करनी में अंतर भी है। वे कहते हैं कि सिस्टम केवल बातों से नहीं बल्कि उसे कैसे चलाते हैं, इससे स्थापित होता है। इसमें केवल नागरिक सरकार या सेना की गलती नहीं बल्कि यह पूरी पाकिस्तान की आवाम की जिम्मेदारी है। पाकिस्तान की बुनियादी जरूरत गुड गवर्नेंस की है। जब सरकार लोगों की जरूरत को पूरा करेगी और ईमानदारी से काम करेगी तो जनता भी उसका साथ देगी और दूसरी कोई ताकत उसे बेदखल नहीं कर सकती। पाकिस्तान में जहां पिछले 70 साल में सेना का सियासी रसूख बढ़ा है, वहीं चीनी और उर्वरक कारखानों से लेकर बेकरी तक के कारोबार में उसकी भागीदारी में भी वृद्धि हुई है तो क्या सत्ता के कारण सेना के व्यवसाय में विस्तार या उसमें स्थिरता आई है? पाकिस्तान में तानाशाही के दौर में पत्रकार भी लोकतंत्र की बहाली और अभिव्यक्ति की आजादी के संघर्ष में शामिल रहे। वरिष्ठ पत्रकार राशिद रहमान का कहना है कि तानाशाही का साथ देने वाले पत्रकारों को बुरी नजर से देखा जाता था, लेकिन आजकल स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। टीवी चैनलों और कुछ हद तक अखबारों में जो खबरें चल रही हैं वो सेना का जनसम्पर्क विभाग तय करता है। इसे जानबूझ कर नहीं तो डर या भय या किसी और कारण से पत्रकारों ने अपना लिया है। मैं समझता हूं कि यह न तो पत्रकारिता की आवश्यकताएं पूरी कर रहा है और न ही वो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर पा रहा है।

-अनिल नरेन्द्र

कश्मीर घाटी में आतंकियों पर घर और बाहर दोनों से दबाव

जम्मू-कश्मीर में जिस तरह हमारे सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों ने आतंकवादियों के खिलाफ अपना अभियान चला रखा है उसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। एक तरफ एनआईए की कार्रवाई और दूसरी ओर सुरक्षा बलों का नामी आतंकी सरगनाओं को चुन-चुनकर मारने से कहा जा सकता है कि घाटी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई धीरे-धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंचती जा रही है। रविवार रात दक्षिणी कश्मीर के शोपियां जिले में सेना, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस ने आतंकवादियों की मौजूदगी का सुराग पाकर अवनीरा गांव की घेराबंदी की। तलाशी अभियान के दौरान जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी तब सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें तीन आतंकी मारे गए और दो सैनिक शहीद हो गए। पूरी रात चली इस मुठभेड़ की उपलब्धि यह रही कि इस इलाके में हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुख्य अभियान कमांडर यासीन इटू उर्फ गजनवी को मारा गिराया। यासीन का नाम सेना की ओर से जारी टॉप 12 आतंकियों की सूची में भी था। यासीन 1996 में संगठन में शामिल हुआ था। 2007 में गिरफ्तार होने के बाद 2014 में छूटा था। 2015 में हिज्ब का चीफ आपरेशनल कमांडर बन गया। वह 2016 में लंबे समय तक चली अशांति को जिन्दा रखने के लिए जिम्मेदार था। यासीन इटू का मारा जाना इस ओर भी इशारा करता है कि पिछले कुछ समय से आतंकी समूहों का सामना करने के मामले में सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच तालमेल बढ़ा है और शायद खुफिया तंत्र को भी सूचनाएं हासिल करने में पहले से ज्यादा कामयाबी मिलने लगी है। दरअसल कुछ समय पहले जिस तरह स्थानीय लोगों के उकसावे में आकर एक पुलिस अफसर को पीट-पीटकर मार डाला था, उसके बाद पुलिस महकमे में भी आतंकी संगठनों के खिलाफ रोष पैदा हुआ और उसने अपने सूचना तंत्र से मिली जानकारी को सेना के साथ साझा करना शुरू कर दिया। यही वजह है कि बीते एक महीने के दौरान लश्कर--तैयबा के शीर्ष कमांडर अबु दुजाना सहित ए प्लस प्लस श्रेणी में रखे गए कई आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली। उधर अमेरिका ने बुधवार को हिजबुल मुजाहिद्दीन पर प्रतिबंध लगाते हुए उसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। आतंकवाद के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करने की भारत की कोशिशों के लिए इसे बड़ी कामयाबी माना जाएगा। कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने में जुटे पाकिस्तान के लिए अमेरिका का यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं। घाटी में आतंकियों पर घर और बाहर दोनों जगह दबाव बढ़ता जा रहा है।

Thursday, 17 August 2017

30 मासूमों की मौत का जिम्मेदार कौन?...(2)

गोरखपुर के बाबा राघव दास मेfिडकल कॉलेज अस्पताल में आक्सीजन की कमी से 64 लोगों की मौत का हादसा अपने आप में इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि आक्सीजन सप्लाई रोकने की वजह से इतनी मौतें होने का यह देश में पहला मामला है। बेशक इसमें हम योगी सरकार को बुरा-भला कहें और उनकी आलोचना करें पर असल में कसूरवार तो वहां का प्रशासन, आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी, वहां के वरिष्ठ अधिकारी व डॉक्टर भी कम नहीं हैं। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत से लड़ते मासूमों की जिंदगी ऑक्सीजन के ऐसे पतले से पाइप पर टिकी थी, डॉक्टरों ने ही कमीशन के लालच में उस पाइप को काट दिया। बच्चों की मौत के बाद अब मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी बता रहे हैं कि मैडम (मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राजीव मिश्रा की पत्नी) सामान्य रवायत से दो फीसदी ज्यादा कमीशन चाहती है। इसीलिए उन्होंने आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान लटका रखा था। सूत्रों के मुताबिक प्राचार्य राजीव मिश्रा अपनी पत्नी के माध्यम से आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स से कमीशन की डिमांड करता था। इनकी पत्नी इसी अस्पताल में ही आयुष डाक्टर हैं। आरोप है कि पत्नी ने पुष्पा सेल्स से 2 लाख रुपए और पहले सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी से 50 हजार रुपए कमीशन की मांग की थी जिसे न देने पर इनका पेमेंट रोक दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि 9 अगस्त 2017 और इससे ठीक एक महीने पहले 9 जुलाई को जब मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अस्पताल का दौरा किया तो दोनों बार दो-दो घंटे की मीटिंग प्रबंधन से हुई थी। इसमें प्रिंसिपल ने अस्पताल के 400 कर्मचारियों का पेमेंट न मिलने पर नियुक्तियों और निर्माण संबंधी समस्याओं पर तो बात की लेकिन आक्सीजन और पेमेंट संबंधी चर्चा छिपा ली गई। जबकि जुलाई से सितंबर माह के बीच में गैस की खपत ज्यादा होती है क्योंकि इंसेफ्लाइटिज की बीमारी इस सीजन में बढ़ जाती है। फिर सवाल यह उठ रहा है कि अगर गोरखपुर के डीएम सचेत होते तो भी यह हादसा टल सकता था। हालांकि सरकार ने आक्सीजन की अपूर्ति बाधित होने से बच्चों की मौत से इंकार किया है लेकिन यह सच है कि आक्सीजन आपूर्ति को लेकर सप्लायर कंपनी और मेडिकल कॉलेज के बीच काफी दिनों से लिखा-पढ़ी चल रही थी। कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ ही जिला प्रशासन को भी इसकी जानकारी थी। कंपनी ने एक अगस्त को प्रिंसिपल को लिखे पत्र की जानकारी डीएम गोरखपुर को भी दी थी। स्थानीय मीडिया कई दिनों से आक्सीजन आपूर्ति बाधित होने की आशंका जता रहा था। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए अपने स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया। कहा जा रहा है कि यदि गोरखपुर के डीएम संवेदनशील होते और मीडिया रिपोर्ट और कंपनी के पत्र को गंभीरता से लेते तो शायद मौजूदा स्थिति से बचा जा सकता था। जानकार बताते हैं कि राजीव रौतेला के खिलाफ विजिलेंस इंक्वायरी में आगे जांच की जरूरत बताई गई थी। इसके बावजूद भी उन्हें सीएम के गृह जिले का कलेक्टर बना दिया गया। इस हादसे के बाद योगी सरकार ने प्रदेश के सभी अस्पतालों से आक्सीजन सिलेंडर का ब्यौरा तलब करते हुए सोमवार तक स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। शासन ने सभी अस्पतालों को आक्सीजन आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों के बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने स्वाइन फ्लू के बढ़ते हुए मरीजों को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया। इसके के साथ बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल डा. कफील खान को उनके पद से हटा दिया गया है। अब वह किसी भी अहम पद पर नहीं रहेंगे। यह कार्रवाई सीएम के दौरे के बाद की गई है। डा. कफील मरीजों की मदद करने को लेकर सोशल मीडिया में सुर्खियों पर आए थे। पर उन पर कई गंभीर आरोप भी लगे हैं। इंसेफ्लाइटिज विभाग के प्रभारी के तौर पर डॉक्टर कफील सीधे तौर पर जिम्मेदार बनते हैं।  इस पूरे हादसे की बारीकी से जांच होनी चाहिए और इन घूसखोरों का पर्दाफाश हो, उन्हें सजा मिले। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में तमाम सरकारी अस्पतालों, सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस का भी पर्दाफाश होना चाहिए। बेशक सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती पर असल में कसूरवार तो वहां के डाक्टर, स्थानीय प्रशासन ही हैं। अब विस्तार से बताते हैं  डाक्टर कफील के बारे में। गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में जिस डॉक्टर कफील अहमद खान को सोशल मीडिया ने फरिश्ता बना दिया, उसके बारे में नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं। कफील अहमद की पत्नी डा. शबिस्ता खान गोरखपुर में मेडी स्प्रिंग चिल्ड्रन अस्पताल चलाती हैं। आरोप है कि डा. कफील सरकारी अस्पताल में नौकरी करते हुए भी अपनी पत्नी के अस्पताल से पूरी तरह जुड़े रहे और वहां प्रैक्टिस करते रहे। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक डाक्टर कफील बलात्कार के भी आरोपी हैं। एक मुस्लिम महिला नर्स ने उन पर अपनी क्लीनिक में बलात्कार का आरोप लगाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में कफील एक साल तक जेल की हवा भी खा चुका है। कफील गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में नौकरी करता है लेकिन उसका खुद का नर्सिंग होम है, जिसमें वह सुबह नौ बजे से रात नौ बजे तक मरीजों को देखता है। इसी बात से समझा जा सकता है कि कफील का कितना कमान सरकारी नौकरी पर है। कफील ने लोकल मीडिया में कई दोस्त बना रखे हैं और उन्हीं के दम पर उसने बच्चों की मौत के बाद अपने पक्ष में खबरें छपवा लीं। हमेशा मुसलमान मसीहा की खोज में रहने वाली दिल्ली की मीडिया ने इस खबर को हाथों हाथ लिया और रातोंरात कफील का इतिहास जाने बिना उसे हीरो बना दिया। बलात्कार के मामले  में फंसे कफील पर पीड़िता नर्स का आरोप था कि 15 मार्च 2015 को कफील और उसके भाई कासिफ जमील ने नौकरी के बहाने क्लीनिक में बुलाकर उसके साथ बलात्कार किया था। पीड़ित नर्स जब शिकायत दर्ज कराने थाने गई तो उसे भगा दिया गया। पता चला कि डाक्टर साहब समाजवादी पार्टी के करीबी हैं और पुलिस उसके खिलाफ एक्शन नहीं ले सकती। किसी तरह सिफारिश लगाने के बाद 19 अप्रैल को पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया पर कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित नर्स ने इंसाफ के लिए कई जगह चक्कर लगाए, आखिर में हारकर वो हाईकोर्ट की शरण में गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने तीन महीने के अंदर कार्रवाई का आदेश दिया। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। छह महीने के बाद महिला ने हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की और इंसाफ की गुहार लगाई। कोर्ट के आर्डर पर जेल गया कफील 30 जनवरी 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोबारा सुनवाई करते हुए पुलिस ने जांच पूरी करने के लिए 3 महीने का और वक्त दिया। अदालत ने इसे अवमानना का मामला मानते हुए तब गोरखपुर के एसपी लव कुमार को आदेश दिया कि वो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। इसके बाद एसएसपी ने कोतवाली थाने के एसओ को आदेश जारी किया और उसके बाद डा. कफील को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। कुछ दिन बाद जमानत पर छूटकर कफील ने फिर से अपना धंधा शुरू कर दिया। यह है डाक्टर कफील अहमद खान की असल कहानी। दर्जनों निर्दोषों की मौत के जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन से लेकर आक्सीजन आपूर्ति करने वाली कंपनी पर घोर लापरवाही और गैर इरादतन हत्या का मामला बनता है। कंपनी नोटिस देने की आड़ में बच नहीं सकती क्योंकि उसे मालूम था कि आक्सीजन की सप्लाई रुकने का क्या परिणाम होगा। यह चौंकाने वाली जानकारी भी आई है कि जब पुष्पा सेल्स का 68.65 लाख का भुगतान रोका गया तो उस समय मेडिकल कॉलेज के खाते में 1 करोड़ 86 लाख रुपए मौजूद था। इसके बावजूद उसका बिल अदा नहीं किया गया क्योंकि कमीशन पर विवाद था। सवाल यह है कि भुगतान किसके कहने पर रोका गया। जैसा मैंने कहा कि मासूमों की इस हत्याकांड की निष्पक्ष, स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। कसूरवार कोई भी हो कोई अपनी जिम्मेदारी से न बचे। यह न तो धर्म का मामला है, न जाति का यह मासूम बच्चों की मौत का मामला है। (समाप्त)

-अनिल नरेन्द्र