Friday, 24 November 2017

पहले कफन का बिल दो फिर मिलेगी लाश

प्राइवेट अस्पतालों की धांधलेबाजी के उदाहरण पहले भी कई बार आ चुके हैं। यह किस तरह से मरीज को लूटते हैं इसका ताजा उदाहरण फोर्टिस अस्पताल का है। द्वारका में रहने वाले जयंत ने अपनी सात साल की बच्ची को फोर्टिस अस्पताल, गुड़गांव ब्रांच में भर्ती करवाया। बच्ची को डेंगू हो गया था। उन्होंने कहा कि वह बच्ची जो बात करते हुए इस अस्पताल में एडमिट हुई थी और करीब 15 दिन बाद उसका ब्रेन 70-80 प्रतिशत तक डेड हो चुका था। दो दिन बाद अस्पताल ने ही उसे किसी ऐसे अस्पताल ले जाने को कहा जहां पिडिएट्रिक आईसीयू (पीआईसीयू) की व्यवस्था हो। इसके बाद वह 31 अगस्त की शाम अपनी सात साल की बेटी आद्या को लेकर गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल पहुंचे। मां दीप्ति सिंह ने बताया कि हम जब अस्पताल जा रहे थे तो हमारी बच्ची ठीक थी। शारीरिक तौर पर वह स्वस्थ लग रही थी, उसे बुखार था। हालांकि राकलैंड अस्पताल ने हमें रिपोर्ट में बता दिया था उसे डेंगू टाइप-4 है। जयंत ने बताया कि हमें पहले तो समझ नहीं आया। बाद में बिल देखने के बाद हमें पता चला कि हमारे साथ क्या हुआ है। 15 दिन का हमारा कुल बिल 15,79,322 रुपए बना। यही नहीं, बच्ची ने जो लास्ट ड्रेस पहनी थी उसका भी 900 रुपए का बिल थमा दिया गया। डेंगू का शिकार हुई बच्ची की मौत के बाद उसके परिवार को 16 लाख का बिल देना आजकल इन प्राइवेट अस्पतालों की लूट का एक उदाहरण है। अस्पताल अब एक बिजनेस बन गए हैं। कोल्ड ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों के शेयर कैपिटल हैं तो अस्पतालों के भी हैं। यानी अस्पताल में इन्वेस्टर ने पैसा लगाया है और मुनाफे के लिए वह अपने प्रॉडक्ट की मार्केटिंग करते हैं। नुकसान होने की स्थिति में ओवर बिलिंग से भी नहीं डरते। इसे डाक्टर नहीं बल्कि सीईओ की गाइडलाइन से चलाया जाता है। यहां सिर्फ अस्पताल का मुनाफा मायने रखता है। एक अस्पताल के मार्केटिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाले ने बताया कि इलाज, जांच, डाक्टरों की फीस सब सीईओ तय करते हैं। इसलिए अस्पताल अपनी मर्जी से बिल बनाते हैं। एक स्ट्रेटजी के तहत हर महीने अस्पताल की कमाई का टारगेट फिक्स किया जाता है। टारगेट पूरा हो रहा है या नहीं, उसके लिए हर महीने 20 तारीख को रिव्यू होता है। टारगेट पूरा नहीं होने पर ओवर बिलिंग का आदेश भी दिया जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी और कहा कि सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी। नड्डा ने घटना को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य सचिव से भी मामले को देखने को कहा है। उन्होंने कहाöमैंने अस्पताल के अधिकारियों से पूछताछ की है और उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। डेंगू के इलाज के लिए 16 लाख के बिल जिसमें 2700 रुपए दस्तानों के भी जोड़े हुए हैं, देने वाले गुरुग्राम फोर्टिस अस्पताल की तरफ हर ओर से शक की अंगुली उठती दिख रही है। कानूनी जानकारों का कहना है कि पीड़ित परिवार का दावा अगर सही है तो वह बढ़े बिल के खिलाफ कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। एडवोकेट आदित्य परोलिया ने बताया कि अगर किसी अस्पताल की ओर से इलाज का बिल बढ़ाचढ़ा कर लिया गया है तो यह अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस में आएगा। अस्पताल की ओर से दी गई सर्विस में कोई खामी है तो यह सीधे-सीधे डिफेक्टिव सर्विसेज का मामला है। इन दोनों ही आरोपों के तहत पीड़ित परिवार कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह बहस का विषय बन गया है कि क्या प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से ज्यादा पैसा लिया जाता है? कई प्राइवेट अस्पतालों को जमीन रियायती दर पर दी गई है, कुछ शर्तों पर दी गई है, क्या सरकार ऐसे लुटेरे अस्पतालों पर कोई अंकुश नहीं लगा सकती? निजी अस्पतालों के रूम, आईसीयू, वेंटिलेटर, लैब व जांच के चार्ज सबसे ज्यादा होते हैं। सरकार को इस पर नियंत्रण करना चाहिए। कर्नाटक सरकार ने निजी अस्पतालों को रेट सूची दी है कि कितना चार्ज लेना है। ऐसे ही हरियाणा समेत अन्य राज्यों को भी करना चाहिए। इस हिसाब से तो मध्यमवर्गीय या गरीब इन अस्पतालों में इलाज भी नहीं करवा सकते।

-अनिल नरेन्द्र

आधार जानकारियों का लीक होना?

निश्चित रूप से अगर यह जानकारी सही है कि केंद्र और राज्य सरकारों की 210 वेबसाइटों ने लोगों की आधार से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक की हैं तो यह चिन्ताजनक ही नहीं बल्कि एक तरह से विश्वास तोड़ना है। अभी तक सरकार की ओर से यह बार-बार आश्वासन दिया जाता रहा है कि आधार से जुड़ी जानकारी एकदम सुरक्षित है और इनके लीक होने का कोई खतरा नहीं है। आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानी यूआईडीएआई भी यही दावा करती है। किन्तु अब इसी संस्थान ने सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में यह भूल स्वीकार की है। यूआईडीएआई ने यह स्पष्ट किया कि उसने इस उल्लंघन पर संज्ञान लिया है और इन वेबसाइटों से जानकारियां हटवा दी हैं। संस्थान ने डाटा लीक होने के सन्दर्भ में अपने एक बयान में कहा है कि तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया है। उसने कहा कि आधार डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है और यूआईडीएआई में डाटा न चोरी हुआ और न ही लीक हुआ है। उसने कहा कि इन वेबसाइटों पर जो डाटा सार्वजनिक किए गए हैं वे सूचना के अधिकार कानून के तहत किए गए हैं और संस्थानों की वेबसाइटों पर लाभार्थियों के नाम, पता बैंक खाता और आधार सहित दूसरी जानकारियां जारी गई हैं। ये आंकड़े तीसरे पक्ष या उपयोगकर्ताओं द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए संग्रहित डाटा हैं जो सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक किए गए हैं। उसने फिर से इस बात पर जोर दिया है कि यूआईडीएआई की ओर से आधार के ब्यौरे को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। हम उसके इस दावे को भी स्वीकार कर लेते हैं कि यह एक व्यवस्थित तंत्र है और भविष्य में जानकारियां लीक न हों, उसके पुख्ता उपाय उसने किए हैं। किन्तु जिन लाभार्थियों के नाम-पते सहित अन्य जानकारियां सार्वजनिक हुईं उनका क्या? अगर किसी ने इसका दुरुपयोग कर ऐसे लोगों के नाम पर कुछ गोरखधंधा कर लिया तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इसलिए यूआईडीएआई का इतना कहना पर्याप्त नहीं हो सकता कि उसने जानकारियां हटवा दी हैं और भविष्य में ऐसा नहीं होगा। केंद्र सरकार विभिन्न सामाजिक सेवा योजनाओं का लाभ उठाने के आधार को अनिवार्य करने की प्रक्रिया में है। सुप्रीम कोर्ट में आधार को अनिवार्य करने पर सुनवाई चल रही है। न्यायालय ने निजी जानकारियों को मौलिक अधिकार माना है। इस फैसले के आधार पर सार्वजनिक की गईं सूचनाएं संबंधित व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आएगा। आधार जानकारियों का लीक होना बहुत बड़ी गलती है और इसके लिए सरकार को और सख्त नियम बनाने होंगे ताकि यह लीक न हों।

Thursday, 23 November 2017

ईरान और सउदी अरब में 36 का आंकड़ा

ईरान और सउदी अरब के बीच 36 का आंकड़ा है। ईरान और सउदी लंबे वक्त से एक-दूसरे के दुश्मन हैं। लेकिन हाल ही में इन दोनों देशों के बीच तनातनी ज्यादा बढ़ने लगी है। सुन्नी प्रमुख वाला सउदी अरब इस्लाम का जन्म स्थल है और इस्लामिक दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण जगहें में शामिल है। यह दुनिया के शुमार सबसे बड़े तेल निर्यातकों और धनी देशों में से एक है। सउदी अरब को डर है कि ईरान मध्य-पूर्व पर हावी होना चाहता है और इसलिए वह शिया नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी और प्रभाव वाले क्षेत्र की शक्ति का विरोध करता है।  युवा एवं शfिक्तशाली क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पड़ोसी यमन में हुई विद्रोहियों के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ रहे है। सउदी का कहना है कि विद्रोहियों को ईरान से समर्थन मिल रहा है लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज किया है। सउदी अरब भी उसके जवाब में विद्रोह करता है और सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को हटाना चाहता है, जो ईरान का मुख्य शिया सहयोगी है। सउदी अरब के पास सबसे अच्छे हथियार से लैस फौज है जो दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातकों में से एक है। इसके पास दो लाख से ज्यादा सैनिक हैं। ईरान 1979 में एक इस्लामिक गणराज्य बना। उस समय वहां राजतंत्र को हटाकर आयतुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में राजनीतिक ताकत ने अपनी पकड़ मजबूत की। ईरान की आठ करोड़ आबादी में शिया मुसलमान बहुसंख्यक हैं। पिछले कुछ दशकों में इराक में सद्दाम हुसैन का दौर गुजर जाने के बाद मध्य-पूर्व इलाके में ईरान ने अपना प्रभुत्व तेज कर लिया। ईरान ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) से लड़ने में सीरिया और इराक में सुन्नी जेहादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। ईरान का यह भी मानना है कि सउदी अरब लेबनान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। यहां ईरान एक शिया अभियान fिहजबुल्लाह का समर्थन कर रहा है।  ईरान अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। ईरान में सेना और आईआरजीसी के जवानों को मिलाकर कुल 5 लाख 34 हजार जवान मौजूद हैं। दूसरी तरफ सउदी अरब के अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान विरोधी रवैए के बाद यह रिश्ते और बेहतर हुए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कभी भी सउदी अरब में कट्टरपंथी इस्लाम की वैसी आलोचना नहीं की जैसी वे ईरान में करते हैं। रूस के संबंध सउदी अरब और ईरान दोनों के साथ हैं। उसके दोनों  ही देशों के साथ आर्थिक गठजोड़ हैं। वह इन दोनों देशों को आधुनिक हथियार बेचता है। मध्य-पूर्व में वर्चस्व की इस लड़ाई में जीत किसी होगी?

-अनिल नरेन्द्र

आतंकियों और नक्सलियों पर भारी पड़ते सुरक्षा बल

आतंकवाद भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। चाहे वह कश्मीर में जेहादियों की हो या नक्सलियों की हिंसा हो इस पर काबू पाना एक समस्या बनी हुई है। पर 2017 का साल हमारे सुरक्षा बलों के लिए अच्छा रहा है। पहले बात करते हैं जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की। कश्मीर में सेना व सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति के कारण बड़े पैमाने पर आतंकियों का सफाया हो चुका है। इस साल रिकार्ड तोड़ आतंकी मारे गए हैं। कश्मीर में 15 कार्प के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जेएस संधु ने इस साल 19 नवम्बर तक 190 आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि की है। आमतौर पर बाकी सालों में यह आंकड़ा एक सौ से नीचे रहता था, लेकिन इस साल यह दो सौ से भी ऊपर चला जाएगा। सेना का कहना है कि घाटी में पाक समर्थित आतंकी संगठन लश्कर--तैयबा के शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो गया है। इस साल जिन 190 आतंकियों को मार गिराया गया उनमें 80 स्थानीय थे और 110 विदेशी आतंकवादी थे। सुरक्षा बलों के चौतरफा दबाव के कारण कश्मीर घाटी में पत्थर बाजी की घटनाओं में भी 90 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष की तुलना में यह बड़ी सफलता है। इस साल मारे जाने वाले आतंकियों में से 5-6 टॉप कमांडर भी थे, जिन्हें सेना, सुरक्षा बलों और पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में मौत के घाट उतारा गया है। दूसरी तरफ सुरक्षा बलों के कसते शिकंजे से नक्सली कमजोर पड़ते जा रहे हैं। दस राज्यों के 106 जिलों में सक्रिय नक्सलियों ने खुद माना है कि 2017 के दस महीनों में उन्हें तगड़ा झटका लगा है। इस दौरान उनके जिन 140 साथियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है, उनमें 34 महिलाएं थीं। यह जानकारी  पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजी) के स्थापना दिवस से पहले नक्सलियों के केंद्रीय सैन्य आयोग की तरफ से जारी बयान में दी गई है। इसमें बताया गया है कि उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान दंडकारण्य (छत्तीसगढ़) में उठाना पड़ा है। वहां 98 नक्सली मारे जा चुके हैं। हालांकि 2017 में नक्सलियों से लोहा लेते हुए सुरक्षा बलों के 71 जवान भी शहीद हो गए। मारे जाने वाले नक्सलियों में उनके डिवीजन  और जोनल स्तर के नेता भी शामिल हैं। नक्सलियों के बयान में प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे अभियान ः समाधान (2017-2022) का विशेष रूप से जिक्र है। साथ ही 2014 से लगातार सुरक्षा बलों के प्रहार की बात भी स्वीकार की गई है। बयान में कहा गया कि 2016 की तुलना में इस साल बीते 10 महीनों में सुरक्षा बलों की तरफ से हमले तेज हुए हैं। इससे बहुत नुकसान हुआ है। खासकर सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में हथियार और कारतूस जब्त कर लिए हैं। सुरक्षा बलों को बधाई।

Wednesday, 22 November 2017

न कारोबार सुधरा और न ही भ्रष्टाचार खत्म हुआ

बेशक अमेरिका की वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 13 साल में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग को एक पायदान सुधारा हो पर क्या वास्तविक जमीनी स्थिति भी सुधरी है? पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अनिल खैतान का तो कुछ और ही कहना है। भारत में कारोबार सुगमता के क्षेत्र में हालात नहीं सुधरे हैं। निचले स्तर पर अभी भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व्याप्त है। खैतान ने कहाöसिर्फ बातें और बातें हो रही हैं, कोई काम नहीं हो रहा। जब तक सरकार जो कहती है उस पर चलती नहीं है तो यह एक बड़ी विफलता होगी। नीतियों की घोषणा तो तब की जाती है, लेकिन नीतियों की घोषणा करने के बाद उन पर अमल नहीं करना एक तरह से उनका बेकार होना है। उन्होंने यह भी कहा कि नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव से उबरने में कारोबार को अभी कम से कम 14 महीने लगेंगे। एक साक्षात्कार में खैतान ने कहा कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व में अब भ्रष्टाचार नहीं  बचा है, लेकिन सरकारी तंत्र के सबसे निचले स्तर पर यह व्यापक रूप से फैला हुआ है। इससे देश का कारोबार सुगमता का माहौल खराब होता है। खैतान से पूछा गया था कि विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत की रैकिंग 30 स्थान सुधरकर 100वें स्थान पर आने के क्या वास्तव में भारत में कारोबार सुगमता का माहौल बेहतर हुआ है? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, नहीं मुझे ऐसा नहीं लगता है। आप किसी बिल्डर से बात कीजिए, हालात वैसे ही हैं, भ्रष्टाचार अब दोगुना हो गया है क्योंकि अब सरकार में शीर्ष पर तो भ्रष्टाचार नहीं है, ऐसे में यदि आप भ्रष्ट नहीं होने की अपनी प्रतिबद्धता पर आक्रमक बने रहते हैं तो निचले स्तर के अधिकारी बड़े आराम से कह देते हैं कि तुम प्रधानमंत्री के पास जाकर ही अपना काम क्यों नहीं करा लेते। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर जुलाई-सितम्बर की तिमाही में 5.7 प्रतिशत से 5.9 प्रतिशत के बीच बनी रहेगी और पूरे वित्त वर्ष में यह 6-6.50 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। सरकार के नोटबंदी के फैसले पर खैतान ने कहाöमेरे विचार में यह एक अच्छा कदम होता अगर सरकार पुराने 500 और 1000 के नोटों को 31 मार्च तक चलने देती और एक अप्रैल 2017 के बाद इसकी कानूनी वैधता खत्म कर देती। उन्होंने कहा कि सरकार को घोषणा करनी चाहिए थी कि हम 500 और 1000 रुपए के नोट की छपाई बंद कर रहे हैं। जो भी व्यक्ति 500 और 1000 रुपए के नोट की घोषणा करते उनसे एक समान 25 प्रतिशत की दर पर कर लिया जाएगा। इस तरह से निश्चित तौर पर काला धन वापस आ जाता।

-अनिल नरेन्द्र

17 साल बाद भारत की मानुषी ने जीता मिस वर्ल्ड का ताज

चीन के सान्या शहर में शनिवार को 67वीं मिस वर्ल्ड विजेता के आखिरी चरण में पूछे गए सवाल का मानुषी छिल्लर ने जो जवाब दिया उससे वह प्रतियोगिता जीत गईं। ज्यूरी के फाइनल राउंड में मानुषी से पूछा गया कि किस प्रोफेशन में सबसे ज्यादा वेतन मिलना चाहिए और क्यों? जवाब में उन्होंने कहाöमां को सबसे ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए, उन्हें कैश में वेतन नहीं, बल्कि सम्मान और प्यार मिलना चाहिए और इस जवाब से ही उन्हें मिस वर्ल्ड का टाइटल मिल गया। इस प्रतियोगिता में तीन कसौटियां हैंöब्यूटी, ग्लैमर और इंटेलीजेंस। 21 साल की मेडिकल छात्रा ने दुनिया की 108 देशों की सुंदरियों को पछाड़ कर यह खिताब जीता। आत्मविश्वास और सहजता के जरिये मानुषी टॉप-40 से सीधे टॉप-15 में जगह बनाने में कामयाब रहीं। इसके बाद टॉप-10 और टॉप-5 में उनकी जगह पक्की रही। अंतिम पांच में इंग्लैंड, फ्रांस, केन्या और मैक्सिको की प्रतिभागी थीं। अंतिम तीन के चयन के बाद उनका मिस वर्ल्ड बनना करीब-करीब तय हो गया था। वहां इंडिया-इंडिया का शोर होने लगा। खिताब जीतने का ऐलान होते ही मानुषी अपने आंसुओं को छिपा नहीं सकीं। आत्मविश्वास से भरी हरियाणा के झज्जर जिले में रहने वाली मानुषी ने फाइनल से ठीक पहले कहा थाöवैसे तो मैं मेडिकल छात्रा हूं लेकिन मेरा कोई प्लान बी नहीं है। मैं अपनी जिन्दगी में किसी बात का पछतावा नहीं करना चाहती, लिहाजा यह खिताब जीतना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मेरा हमेशा से मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने का लक्ष्य रहा है। यह मेरे परिवार और मेरे दोस्तों का भी सपना रहा है। मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली मानुषी से पहले प्रियंका चोपड़ा, युक्ता मुखी, डायना हेडन, ऐश्वर्या राय बच्चन और रीता धारिया ने यह खिताब जीता था। इस जीत के साथ ही भारत ने मिस वर्ल्ड का ताज हासिल करने के मामले में वेनेजुएला (6 मिस वर्ल्ड) की बराबरी कर ली है। मिस हरियाणा रह चुकी मानुषी ने इसी साल जून में मिस इंडिया और मिस फोटोजेनिक का अवार्ड भी जीता है। मिस वर्ल्ड में जाने से पहले वह समाज सेवा से जुड़ी रही हैं। उन्होंने माहवारी के दौरान हाइजीन से संबंधित एक अभियान में करीब 5000 महिलाओं को जागरूक किया। मिस वर्ल्ड की वेबसाइट पर मानुषी की प्रोफाइल में लिखा है, मिस मानुषी छिल्लर कार्डियेक सर्जन बनना चाहती हैं और उनका इरादा ग्रामीण इलाकों में गैर-लाभकारी अस्पताल खोलने का है, ताकि गरीबों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मुहैया हो सके। जीत के बाद मानुषी ने ट्वीट करके कहाöनिरंतर प्यार, मदद और प्रार्थनाओं के लिए आप सभी का शुक्रिया, यह खिताब भारत के लिए है। बधाई मानुषी।

Tuesday, 21 November 2017

चीन में बढ़ता भ्रष्टाचार

कौन कहता है कि चीन में भ्रष्टाचार नहीं है? पिछले कुछ दिनों से चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। इस अभियान से जुड़े सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग शिआओडू का कहना है कि यदि इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो चीन का अंजाम भी सोवियत संघ जैसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में विफलता मिलती है, तो वह देश के लिए घातक होगा। चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली में लिखे संपादकीय लेख में उन्होंने यह बात कही है। महाशक्ति माना जाने वाला सोवियत संघ 1991 में 15 देशों में विभाजित हो गया था। शिआओडू को सेंट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लिन एब्शन के डिप्टी सेक्रेटरी से पदोन्नत करके पोलित ब्यूरो का सदस्य बनाया गया है। उनको भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में शामिल देश का दूसरे नम्बर का शीर्ष अधिकारी माना जाता है। पोलित ब्यूरो के सदस्यों का देश की सत्ता पर पूरा नियंत्रण होता है। शिआओडू ने अपने लेख में पिछली सरकार की कड़ी आलोचना भी की है। उन्होंने कहा कि पिछले शासनकाल में भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ गया था कि पार्टी का नेतृत्व कमजोर पड़ गया। सरकार ने भ्रष्टाचार को बढ़ने दिया। कार्रवाई करने में किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। शिआओडू से पहले एंटी करप्शन प्रमुख झाओ लेजी ने चीनी अखबार पीपुल्स डेली के संपादकीय में भ्रष्टाचार को लेकर भी इसी तरह का लेख लिखा था। लेजी को वांग किशान की जगह एंटी-करप्शन का नया प्रमुख बनाया गया है। लेख में शिआओडू ने कहा कि अगर चीन में भ्रष्टाचार को खत्म नहीं किया गया तो देश का स्वरूप ही बदल जाएगा और यह बर्बाद हो जाएगा। अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो भविष्य में देश के लोगों का सोवियत संघ की तरह हश्र होगा। शिआओडू ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनपिंग भी अपने पूर्ववर्तियों की तरह मानते हैं कि अगर सत्ता पर पकड़ ढीली हुई तो देश में उथल-पुथल मच सकती है। इससे देश बिखर भी सकता है। इसी वजह से सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा अपने कैडर से सोवियत संघ के विघटन का अध्ययन करने को कहती है। उन्होंने संकेत दिया कि शी चिनपिंग के दाहिने हाथ माने जाने वाले वांग किशान के जाने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर नहीं होगी। पिछले महीने पार्टी में हुए बदलाव से पहले वांग को चीन का दूसरा सबसे शक्तिशाली नेता माना जाता था। उनको पिछले महीने ही एंटी-करप्शन के प्रमुख पद से हटाया गया था। शिआओडू ने कहा कि राष्ट्रपति शी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई में काफी सफलता पाई है।

-अनिल नरेन्द्र