Tuesday, 24 October 2017

शी जिनपिंग के तख्तापलट की साजिश

एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी का दावा है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को हटाने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। इस अधिकारी ने दावा किया है कि कम्युनिस्ट पार्टी में ऊंचे ओहदे पर बैठे कुछ सदस्यों ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों से सत्ता छीनने की साजिश की थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई शी जिनपिंग की मुहिम के बाद पार्टी के इन सदस्यों को या तो गिरफ्तार कर लिया गया या जेल में डाल दिया गया। पार्टी के बड़े नेता और चायना सिक्यूरिटी रेगुलेटरी कमीशन के चेयरमैन ल्यू शियू ने यह सनसनीखेज खुलासा पार्टी की 19वीं कांग्रेस की बैठक से इतर चर्चा के दौरान किया। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार ल्यू ने बताया कि पार्टी के अंदर असंतुष्ट नेताओं ने सत्ता हथियाने के लिए यह साजिश रची थी। उनमें पार्टी की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी की सदस्यता के दावेदार सुन झेनसाई और उनकी पत्नी भी शामिल थीं। झेनसाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया गया। झेनसाई के खिलाफ इस कार्रवाई ने चीन के लोगों को बो शिलाई की याद दिला दी। पांच साल पहले जिनपिंग को चुनौती देने वाले शिलाई फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। बता दें कि शी जिनपिंग ने 18 अक्तूबर को पार्टी कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए अपने साढ़े तीन घंटे के भाषण में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में अब तक 10 लाख अधिकारियों को सजा दिलवाने के बाद पार्टी और प्रशासन पर जिनपिंग की पकड़ काफी मजबूत हुई है। इसके अलावा चीनी जनता में भी उनकी छवि चमकी है। भ्रष्टाचार के मामलों में अब तक 3453 भगोड़ों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले पर नजर रखने वाले कुछ जानकारों का कहना है कि इस मुहिम का उद्देश्य शी जिनपिंग के प्रतिद्वंद्वियों को रास्ते से हटाना था। लेकिन इस ताजा दावे ने कम्युनिस्ट पार्टी की छवि पर सवाल पैदा कर दिए हैं और पार्टी में सत्ता को लेकर चल रहे संघर्ष को दुनिया के सामने रख दिया है। इस मुहिम के बारे में कई लोगों को लगा कि कई गिरफ्तारियां राजनीति से प्रेरित थीं और जिनपिंग की पूरी ताकत हथियाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले शी जिनपिंग ने पार्टी के भीतर सत्ता को लेकर संघर्ष की खबरों से इंकार किया था। गुरुवार को चीन के सिक्यूरिटी कमीशन के प्रमुख ल्यू शियू ने पार्टी के छह वरिष्ठ सदस्यों के नाम जाहिर किए जिन्हें उन्होंने अत्यधिक लालची और बेहद भ्रष्ट कहा और कहा कि इन लोगों ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की कोशिश की और तख्तापलट करने की साजिश की। ल्यू ने आगे कहा कि शी जिनपिंग ने इन समस्याओं को सुलझा लिया है और पार्टी और देश के लिए एक बड़े खतरे को खत्म करने में कामयाबी हासिल कर ली है। फिलहाल शी जिनपिंग सेफ हैं?

-अनिल नरेन्द्र

आईएमएफ द्वारा आर्थिक सुधारों के तीन सुझाव

भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर घटाने के एक सप्ताह बाद आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में जो टिप्पणियां की हैं वे उत्साह बढ़ाने के साथ-साथ बेहतरी की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित करने वाली भी हैं। आईएमएफ ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। इस विश्व संगठन की प्रमुख क्रिस्टिना लेगार्ड ने साफ-साफ कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था पटरी पर है और नोटबंदी तथा जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक फैसलों के कारण छोटी अवधि में भले ही विकास दर प्रभावित हुई हो लेकिन मध्यम व दीर्घावधि में इसका लाभ मिलना तय है। गौरतलब है कि इससे पहले आईएमएफ ने खासकर नोटबंदी से अर्थव्यवस्था के प्रभावित होने की बात कहते हुए आर्थिक विकास दर में लगभग एक प्रतिशत की कमी आने की आशंका जाहिर की थी। आईएमएफ ने भारत के लिए त्रिपक्षीय ढांचागत सुधार दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव भी दिया है। इसमें को-ऑपरेटिव बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर हालत से बाहर निकालना, राजस्व संबंधी कदमों के माध्यम से वित्तीय एकीकरण को जारी रखना और श्रम एवं उत्पाद बाजार की क्षमता को बेहतर करने के लिए सुधार शामिल हैं। आईएमएफ में एशिया प्रशांत विभाग के उपनिदेशक केनेथ कांग ने कहा कि एशिया का परिदृश्य अच्छा है और यह मुश्किल सुधारों के साथ भारत को आगे ले जाने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत के लिहाज से को-ऑपरेटिव और बैंकिंग क्षेत्र के कमजोर हालत से बाहर निकालकर उनकी सेहत सही करना बहुत जरूरी है। लेबर और प्रोडक्ट मार्केट की क्षमता में और सुधार की जरूरत है। राजस्व संबंधी कदमों के जरिये फिस्कल कंसोलिडेशन को जारी रखना भी जरूरी है। कृषि सुधारों को आगे बढ़ाना होगा। उधर औद्योगिक मंडल फिक्की के अध्यक्ष पंकज पटेल ने भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यह उद्योग जगत के अनुकूल नहीं हैं और नीतिगत दरों में कटौती नहीं करके रिजर्व बैंक की आर्थिक वृद्धि में बाधा उत्पन्न कर सकता है। गौरतलब है कि चार अक्तूबर को अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों को छह प्रतिशत के पूर्व स्तर पर बनाए रखा जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए उसने देश की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया। पटेल ने कहा कि इस तरह के कदम विकास विरोधी हैं। पत्रकारों के एक समूह से पटेल ने कहा कि रिजर्व बैंक उचित व्यवहार नहीं कर रहा है। महिलाओं के लिए ज्यादा मौके पैदा करने की जरूरत है जिससे अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के साथ-साथ सामाजिक विकास भी होगा। चूंकि एशिया में बेहतर आर्थिक विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं, ऐसे में ढांचागत सुधारों को लागू कर भारत इसका फायदा उठा सकता है।

Sunday, 22 October 2017

अब सांप के जहर का काला कारोबार

पश्चिम बंगाल की सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) ने कोबरा सांप के सफेद जहर के काले कारोबार के अब बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पैसे के लिए नए-नए धंधों का पर्दाफाश हो रहा है। एसएसबी की 63वीं बटालियन वारासात ने विशेष सूचना के आधार पर वन विभाग व कोलकाता पुलिस के नार्को सेल की संयुक्त टीम ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनसे करीब नौ पौंड जहर बरामद किया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत सौ करोड़ रुपए आंकी गई है। गिरफ्तार अभियुक्तों में नारायण दास (26), दबो ज्योति बोस (43) व बुद्धदेव खन्ना (40) तीनों पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। एसएसबी के मुताबिक जब्त जहर कोबरा का तरल, क्रिस्टल व पाउडर के रूप में तीन जारों में एकत्रित किया गया था। चिकित्सा के लिए इसका इस्तेमाल होना था। इसे कैंसर के इलाज व मादक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है। बरामद जहर को वन विभाग को सौंप दिया गया है। पकड़े गए तीनों तस्कर एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के सदस्य हैं। यह गिरोह पड़ोसी देश में सांप के जहर का कारोबार करता है। इस जहर की सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रास्ते चीन में तस्करी की जानी थी। इससे पहले भी एसएसबी ने 70 करोड़ रुपए के जहर के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। सफेद जहर के इस काले कारोबार के अंतर्राष्ट्रीय गिरोह के तार कई देशों में फैले हुए हैं। एसएसबी ने सिर्फ तीन जार पकड़े हैं, अभी भी 33 जार जहर गायब है। इसकी कीमत 1100 करोड़ रुपए है। पकड़ा गया जहर फ्रांस से तस्करी करके साउथ-ईस्ट एशिया में किसी देश में जहाज के जरिये भेजा जा रहा था। इस जहाज को बीच समुद्र (हाई सी) में बांग्लादेशी लूटेरों ने कोई कीमती सामान समझकर लूट लिया। बांग्लादेश से यह जहर कोलकाता पहुंचा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से चीन पहुंचाने की तैयारी थी। सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नैक भी कहते हैं, यहां पर तीन देशों की सीमाएं मिलती हैं। इसमें नेपाल, भूटान व बांग्लादेश शामिल है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार एक सांप से प्वाइंट दो ग्राम जहर एक महीने में निकाला जा सकता है। बरामद जहर नौ पौंड यानि करीब तीन किलो छह सौ ग्राम है और 33 जार अभी भी गायब हैं। हजारों सांपों से यह जहर निकाला गया होगा। जहरीले सांप की केवल चार प्रजाति भारत में हैं। इसमें कोबरा, किंग कोबरा, करेर व वारपर शामिल हैं। जहरीले सांपों की 216 प्रजाति भारत में पाई जाती हैं। सिलीगुड़ी कॉरिडोर जहर तस्करों के लिए स्वर्ग बन गया है।

-अनिल नरेन्द्र

जब त्रेता युग में राम वन से लौटे होंगे तो अयोध्या में ऐसा ही नजारा होगा

अयोध्या ने बहुत-सी दीपावली देखीं पर इस दीपावली अयोध्या बदली-बदली-सी दिखी। हर तरफ उत्साह था, उमांग थी। हर आंखें इंतजार में डूबी हुई थीं। त्रेता युग में भगवान राम वन से जब लौटे होंगे तो कुछ ऐसा ही नजारा रहा होगा, जिसकी वहां मौजूद आंखें गवाही दे रही होंगी। स्वच्छ-निर्मल, सजी-संवरी अयोध्या बिना बोले ही बहुत कुछ कह रही थी। शायद यह दुनिया को संदेश दे रही थी कि शासन-सत्ता संकल्प ले ले तो आज भी भारत में रामराज्य उतारना असंभव नहीं। कलाकारों और रामभक्तों का जोश देखते ही बनता था। सब राममय हो गए। 14 बरस के वनवास से लौटे भगवान राम का जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्याभिषेक किया तो हर आंख से खुशी की अश्रुधाराएं बह निकलीं। दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए कई दिन पहले से ही अयोध्या को सजाने-संवारने का काम शुरू हो गया था। मुख्य मार्ग समेत एक-एक गली को चमकाया गया। अयोध्या की दीपावली इस बार सबसे अलग थी। सबसे भव्य रही। सुनहरे रंगों से सजी यह प्राचीन नगरी में कहीं इंद्रधनुषी रंगोली तो कहीं संगीत के स्वर सुने जा सकते थे। कहीं भजन तो कहीं नृत्यों की प्रस्तुतियां। अंधेरे में कंदील हवाओं से लड़ रहे थे। पूरी अयोध्या दीपों से विशेष तौर पर सजाई गई। अयोध्या में पहली बार ऐसा हुआ है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरयू के किनारे राम की पैड़ी पर दो लाख दीप जलाकर विश्व रिकार्ड बना रहे थे और इसे पुराना स्वरूप दे रहे थे। राजनीतिक कार्यक्रमों से अलग उत्तर प्रदेश का आम नागरिक भी कम उत्साहित नहीं था। सैकड़ों की तादाद में लोगों ने रामलला के दर्शन किए। 14 बरस बाद प्रदेश की सत्ता में लौटी भाजपा ने इस बार कलियुग की छोटी दीपावली के दिन को त्रेता युग के संयोग से जोड़कर सियासी संदेश देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। त्रेता युग की तरह भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के 14 बरसों के बाद वनवास से अयोध्या वापस आने वाले दिन को उल्लास, उत्साह व उमंग की परिकल्पना के सहारे संजीव बनाते हुए प्रतीकों के सहारे एजेंडे को धार दी गई। शोभा यात्रा निकालकर, पुष्पक विमान की तरह हेलीकॉप्टर से भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को सरयू के तट पर राम कथा पार्क के बगल में लाकर तथा स्वागत करके, त्रेता में वशिष्ठ की तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों अभिषेक कराकर और आकाश से पुष्पवर्षा के प्रसंग को साकार करने के लिए हेलीकॉप्टर का प्रयोग करके भाजपा सरकार यह संदेश भी देने में सफल हो गई कि वह न तो राम को भूली है और न ही अयोध्या को। आयोजन से लेकर भाषण तक में यह साफ हो गया कि भाजपा ने अतीत से बहुत कुछ सीखा है। उसे पता है कि सत्ता में आने के बाद अयोध्या को भूलना उस पर कितना भारी पड़ चुका है, इसलिए दीपावली के बहाने भाजपा ने यह जताने की कोशिश की गई कि इस बार वह अपने सरोकारों की अनदेखी नहीं करने वाली। अयोध्या, मथुरा व काशी तथा राम, शिव व कृष्ण उसकी ताकत हैं। इसलिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने यह कहा कि सिर्फ अयोध्या ही नहीं बल्कि हिन्दुत्व के सरोकारों से जुड़े सभी स्थानों का अयोध्या जैसा ही विकास होगा। शायद इसलिए उन्होंने विंध्याचल, शाकम्भरी देवी, देवी पाटन, नौमिषारण्य आदि को दिव्यता व भव्यता देने की बात की। अयोध्या यात्रा में योगी श्रीराम जन्मभूमि दर्शन को नहीं गए। उन्होंने मंदिर की भी बात नहीं की। पर उन्होंने यह कहा कि आपकी भावना का सम्मान होगा। संकेतों में न सिर्फ अपना बल्कि भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार का संकल्प सार्वजनिक कर दिया। कुल मिलाकर इस पूरे आयोजन के सहारे भाजपा ने न सिर्फ निकट भविष्य का एजेंडा सेट कर दिया है बल्कि लोकसभा चुनाव के लिए भी आक्रामक रुख के साथ मैदान में उतरने का अपना इरादा जाहिर कर दिया है। अगले लोकसभा चुनाव में हिन्दुत्व फिर से बड़ा मुद्दा होगा।

Saturday, 21 October 2017

वन-वूमैन विकीलीक्स डैफनी की कार बम से हत्या

जब सिस्टम फेल होता है तो अंत तक लड़ने वाला व्यक्ति पत्रकार ही होता है और सबसे पहले मारा जाने वाली भी पत्रकार होता है। माल्टा में पनामा पेपर्स से मशहूर हुए सनसनीखेज दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाली पत्रकार ब्लॉगर डैफनी कैरुआना गैलीजिया की एक कार बम धमाके में हत्या कर दी गई। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार डैफनी की सोमवार को उस वक्त मौत हो गई जब उनकी कार प्यूजो 108 को एक शक्तिशाली विस्फोट से उड़ा दिया गया। डैफनी कैरुआना को हाल ही में अमेरिकी समाचार संस्था पॉलिटिको द्वारा वन-वूमैन विकिलीक्स के रूप में वर्णित किया गया था। कहा जाता है कि वह एक ऐसी ब्लॉगर थीं जिनकी पोस्ट को देश में सभी समाचारों को मिलाकर जितनी प्रसार संख्या बनती है, उससे भी अधिक लोगों द्वारा पढ़ा जाता था। उनके नए खुलासे ने माल्टा के प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट और उनके दो सबसे करीबी सहयोगियों पर आरोप लगाए थे। खुलासे में तीन व्यक्तियों को बाहरी कंपनियों से जोड़ा गया और कहा गया कि वह माल्टा के पासपोर्ट को बेच रहे थे और उनको अजरबैजान सरकार की ओर से भुगतान किया जा रहा था। डैफनी किसी मीडिया संस्थान से नहीं जुड़ी हुई थीं। सिर्फ `रनिंग कमेंट्री' नाम से ब्लॉग लिखती थीं। माल्टा की आबादी 4.5 लाख है। चार लाख लोग डैफनी के ब्लॉग पढ़ते थे। दो बजकर 35 मिनट पर डैफनी ने अंतिम ब्लॉग शे ब्री के बारे में पोस्ट किया और कार लेकर निकलीं। इसके 35 मिनट बाद ही कार में विस्फोट हो गया। माल्टा के प्रधानमंत्री जोसेफ ने बयान जारी कर कहा कि हत्याकांड में उनका हाथ नहीं है। मस्कट ने कहाöये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। डैफनी राजनीतिक और व्यक्तिगत तौर पर मेरी आलोचकों में से एक थीं। पर इन बातों का हत्या से कोई संबंध नहीं। डैफनी के बेटे मैथ्यू भी पत्रकार हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखाöमेरी मां कानून और इसे तोड़ने वालों के बीच हमेशा खड़ी रहीं। इसलिए मारी गईं। पीएम जोसेफ मस्कट की शे ब्री और पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। वह डैफनी की हत्या के जिम्मेदार हैं। वैसे पुलिस ने इस हत्या की जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक किसी ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है। बता दें कि कुछ समय पहले दुनिया में सबसे अधिक गोपनीयता से काम करने वाली पनामा की कंपनी मौसाक फोंसेका के लाखों कागजात लीक हो गए थे। पनामा पेपर्स से 52 देशों के भ्रष्टाचार उजागर हुए थे। पाकिस्तान में तो नवाज शरीफ और उनके परिवार पर पनामा पेपर्स को लेकर कार्रवाई भी शुरू हो गई है। पनामा पेपर्स में रूस के राष्ट्रपति पुतिन के एक करीबी सहयोगी के संदिग्ध मनी लांड्रिंग गिरोह का भी पता चला था। इससे जुड़े ज्यादातर मामले धन के मालिकों की पहचान छिपाने, धन के स्रोत छिपाने, काले धन को सफेद करने और कर चोरी के हैं। एक और ईमानदार पत्रकार शहीद हो गया है।

-अनिल नरेन्द्र

हिन्द की शान ताजमहल पर नफरत की सियासत?

दुनियाभर में मोहब्बत की निशानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले और दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा का ताजमहल आज एक गैर जिम्मेदार भाजपा विधायक की बकवास के कारण बिना वजह विवादों का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि मेरठ के सरधना से भाजपा विधायक संगीत सोम ने कहा था कि गद्दारों के बनाए ताजमहल को इतिहास में जगह नहीं मिलनी चाहिए। यह भारतीय संस्कृति पर धब्बा है। ताजमहल बनाने वाले मुगल शासक ने उत्तर प्रदेश और हिन्दुस्तान से सभी हिन्दुओं का सर्वनाश किया था। ऐसे शासकों और उनकी इमारतों का नाम अगर इतिहास में होगा तो वह बदला जाएगा। ऐसा बेहूदा बयान संगीत सोम ने क्यों दिया? माना जा रहा है कि पार्टी में कुछ दिनों से अलग-थलग चल रहे संगीत सोम ने चर्चा में रहने के लिए ऐसा विवादित बयान दिया है। साथ ही खुद के खिलाफ पार्टी विरोधी काम करने के आरोप में कार्रवाई करने की जिला संगठन की सिफारिश को रोकने का दबाव बनाने के लिए सोची-समझी रणनीति के तहत यह विवादित बयान दिया है। दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सोम ने भाजपा विरोधी उम्मीदवार का समर्थन किया था। हालांकि जिसे उन्होंने समर्थन दिया वह हार गया। इसको लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा ने प्रदेश नेतृत्व को पत्र लिखकर सोम के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। संगीत सोम उग्र सांप्रदायिक बयानों के लिए जाने जाते हैं। ताजमहल के बारे में उन्होंने जो कुछ कहा वह उनके खास तरह के मिजाज का ही इजहार लगता है। लेकिन इस सिलसिले की शुरुआत हुई इस खबर से कि उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग ने राज्य के पर्यटन स्थलों की सूची से ताजमहल को हटा दिया है। इस पर विवाद उठना ही था। स्वाभाविक ही राज्य सरकार की काफी किरकिरी हुई। और अगर भाजपा के लोग सोचते हैं कि ऐसे बयानों से विवादों में उन्हें सियासी फायदा होगा तो उनकी यह धारणा गलतफहमी ही साबित होगी। ताजमहल के साथ पूरे देश की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, वे इसे दुनियाभर को आकर्षित करने वाली एक ऐसी धरोहर के तौर पर देखते हैं जिस पर उन्हें नाज है। उत्तर प्रदेश इस पर फख्र करता आया है कि ताजमहल उनके पास है। यह भारत की स्थापत्य और कला-कारीगरी का एक बेमिसाल नमूना है। मुट्ठीभर लोग ही होंगे जो इसे धर्म या संप्रदाय के चश्मे से देखें। मजे की बात यह है कि खुद भाजपा सरकार के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा, संगीत सोम जैसे लोगों की राय से इत्तेफाक नहीं रखते। दो दिन पहले ही उन्होंने कहा कि ताजमहल को पर्यटन स्थलों की सूची से हटाए जाने का कोई सवाल ही नहीं है, यह दुनिया के सात अजूबों में शामिल है और देश की चन्द सबसे खूबसूरत धरोहरों में शुमार है। भारत घूमने आने वाला शायद ही कोई पर्यटक ऐसा हो जो ताजमहल का दीदार न करना चाहे। ताजमहल हो लाल किलाöये धरोहर हमारी विरासत का अटूट हिस्सा हैं और इनकी ऐतिहासिकता पर नए सिरे से कुछ कहने-सुनने से वह हकीकत नहीं बदलेगी, जो इतिहास के पन्नों में इनके बारे में अरसे से दर्ज है। चुनावी राजनीतिक फायदे-नुकसान के नजरिये से कुछ नेतागण इन पर कोई टिप्पणी करते हैं तो उन्हें समझना होगा कि ऐसी बयानबाजी खुद उनकी राजनीति को ज्यादा दूर नहीं ले जाएगी। बल्कि यह हो सकता है कि ऐसे नेता अपने बिगड़ैल बयानों की वजह से जनता में अपनी जमीन खो बैठें। भाजपा अनुशासन का दम भरती है। फिर क्या कारण हैं कि उनके एक विधायक को ऐसा बेहूदा बयान देने की खुली छूट दी जा रही है। यह भी देखना बाकी है कि संगीत सोम पर पार्टी आलाकमान क्या कार्रवाई करती है?

Thursday, 19 October 2017

क्या गुरदासपुर हार से बीजेपी आलाकमान कोई सबक लेगा?

गुजरात, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा व राजस्थान में प्रस्तावित चुनावों की रणनीति पर अमल कर रहे पीएम मोदी तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पंजाब में भाजपा की लगातार गिर रही साख पर चितिंत होना चाहिए। गुरदासपुर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत को बीजेपी के लिए करारा झटका माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के नेताओं को लग रहा है कि उसकी वजह पार्टी इकाई में चल रही गुटबाजी और राष्ट्रीय नेतृत्व की बेरुखी भी है। पार्टी के भीतर भी यह आंकलन किया जा रहा है कि इस हार का पंजाब की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ेगा क्योंकि राज्य में बीजेपी और कमजोर हो गई है। बीजेपी के लिए चिंता का विषय यह भी होना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश में चुनाव सिर पर है और हिमाचल का एक बड़ा हिस्सा पंजाब के गुरदासपुर के बार्डर से जुड़ा हुआ है, जहां इस उपचुनाव का सीधा असर पड़ सकता है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की बढ़ती लोकप्रियता को कांग्रेस हिमाचल में भी जरूर भुनाने का प्रयास करेगी। पंजाब की तरह से ही हिमाचल प्रदेश से भी बहुत संख्या में लोग सेना में हैं। कैप्टन भी सेना से जुड़े रहे हैं और सैनिकों व उनके परिजनों के हक में आवाज बुलंद करते रहे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि चुनाव प्रचार के मैदान में उनकी मौजूदगी हिमाचल के कांग्रेसी किले को बचाने में मददगार साबित हो सकती है। गुरदासपुर उपचुनाव बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि उसके पास यह अवसर था कि वह इस सीट को फिर से जीतकर कांग्रेस की राज्य सरकार की असफलताओं को उजागर कर सकती थी लेकिन पार्टी इसमें नाकाम रही है। बीजेपी के एक सीनियर लीडर के मुताबिक हार से ज्यादा बीजेपी के लिए हार का अंतर है। लगभग दो लाख वोटें का अंतर बड़ा अंतर माना जाता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस उपचुनाव में खुद पार्टी के आला नेताओं ने कोई दिलचस्पी नहीं ली। यहां तक कि कोई राष्ट्रीय स्तर का नेता इस उपचुनाव में प्रचार करने तक नहीं गया। इस उपचुनाव में भाजपा-अकाली के बीच फांक नजर आई। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल एक बार भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए। उधर कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू सहित बड़े नेता लगातार अपने उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव प्रचार करते रहे। इससे भी कांग्रेस के प्रति लोगों में सकारात्मक संदेश गया। उधर विधानसभा चुनाव में शिकस्त के बाद आम आदमी पार्टी दावा करती रही कि पंजाब में उसकी लहर थी और केंद्र सरकार की राह पर वोटिंग मशीनों  में गड़बड़ी करके उसे हराया गया, उसे भी अब अपनी जनाधार की हकीकत का पता चल गया होगा। इस उपचुनाव में भाजपा की हार के पीछे एक बड़ा कारण नोटबंदी और फिर जीएसटी लागू होने के बाद किसानों और कारोबारियों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर उनकी नाराजगी को भी माना जा रहा है। क्या बीजेपी आलाकमान चिंतित है?

-अनिल नरेन्द्र